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पिघलता आर्कटिक और ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन डे
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डिजिटल ही सही, लेकिन इस साल भी होगा ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन डे साल 2020 खत्म होने से पहले ही ऐतिहासिक बन चुका है। और इस ऐतिहासिक साल में एक यादगार दिन होगा सितम्बर 25 जिसे याद किया जायेगा ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन डे के नाम से। इस दिन,कोविड-19 के मद्देनज़र सभी सावधानियों बरतते हुए, दुनिया भर में फ्राइडे फॉर फ्यूचर के बैनर तले स्कूल हड़ताल आंदोलन होगा और दुनिया भर में बेहतर जलवायु की माँग रखते हुए प्रदर्शन होंगे। लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान, कोविड-19 महामारी ने कार्यकर्ताओं और आंदोलनकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के नए तरीके खोजने पर मजबूर कर दिया है। आखिर अब पैदल मार्च और भीड़ का हिस्सा बनना जनहित में सुरक्षित जो नहीं। और इसी क्रम में जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ इस आन्दोलन ने डिजिटल अवतार धारण कर लिया है। कल, मतलब 25 सितंबर को इस साल का पहला ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन डे होगा। अपना बयान जारी करते हुए फ्राइडे फॉर फ्यूचर ने कहा कि हालात ऐसे बन रहे हैं कि पेरिस एग्रीमेंट के समझौते के तहत ग्लोबल मीन तापमान को 1.5C...
पन्ना बाघ पुनःस्थापन योजना एवं पयर्टन विकास
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पन्ना पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पन्ना बाघ पुन स्थापना के तहत पार्क प्रबन्धक द्वारा किये गए कार्य में निम्न अनुसार है बाघों की संख्या में बढ़ोतरी पन्ना टाइगर रिजर्व मे 05 संस्थापक बाघ तथा 58 पन्ना में जन्मे जिनमें 27 वयस्क है (14 नर और 13 मादा)अर्धव्यस्क 27 (नर 09 मादा 16 एव और 2 लापता ) एव 09 शावक है अर्थात कुल 63 बाघ मौजूद है जो 2017_18 की तुलना में बाघों को संख्या में दोगुने से सभी ज्यादा हो गई है हाथियों के कुनवे ने व्रद्धि | पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत वर्ष 2017 /18 तक कुल 13 हाथी थे इस तरह कुशल प्रबन्धन के कारण मोहनकली एवं रूपकली ने एक एक बच्चे को जन्म दिया जिससे हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय व्रद्धि हुईं है आज की संख्या स्थिती में कुल 15 हाथी है घड़ियाल की संख्या केन घड़ियाल अभयारण्य में पूर्व में मात्र एक घड़ियाल था गत वर्ष चम्बल अभ्यारण्य मुरैना से 25 घड़ियालों को केन नदी में छोड़ा गया है मानव वन्य प्राणी द्वन्द्व रोधी तन्त्र प्रयोग पन्ना टाइगर रिजर्व की सीमा पर स्थिति ग्रामों से वन्य प्राणियों का आवागमन बना रहता...
प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए क्योंकि जिला केंद्र के बिल्कुल बगल में ऐसी ग्राम पंचायत जिसमें ना शिक्षा है ना सड़क है ना बिजली है और ना ही उनके बच्चों का उज्जवल भविष्य है ऐसी स्थिति राजनेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठाती है
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पन्ना हिम्मत खान माझी समाज और आदिवासी समाज को मूलभूत सुविधाओं का हक मिल कर रहना चाहिए और प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए क्योंकि जिला केंद्र के बिल्कुल बगल में ऐसी ग्राम पंचायत जिसमें ना शिक्षा है ना सड़क है ना बिजली है और ना ही उनके बच्चों का उज्जवल भविष्य है ऐसी स्थिति राजनेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठाती है मध्य प्रदेश माझी जनजातीय संयुक्त संघर्ष समिति आज समिति द्वारा ग्राम पंचायत मोहन पुरवा का ग्राम चिमट आदिवासी टोला जनपद पंचायत रहवासी जो लगभग 1990 से निवासरत है एवं मूलभूत सुविधाएं जैसे कि सड़क की सुविधा क्योंकि वहां पर पहुंच मार्ग बहुत ही टेढ़ा मेड़ा है और पीने की पानी की व्यवस्था नही है क्योंकि वहां पर जो हैंडपंप है वह बरसों से खराब है लोग वहां जंगल का झिरियों का पानी पीते हैं जिससे बीमार हो रहे हैं वहां पर बिजली नहीं है बिजली के लिए कई बार जिला केंद्र में ज्ञापन दिया जाए दिया जा चुका है और सबसे बड़ी समस्या कि वहां पर करीब तकरीबन 500 आदिवासी समाज के लोग निवास है जो जिनके करीब 100 से 200 बच्चे जो शिक्षा से वंचित ...
आर्थिक तंगी और मंहगाई से ग़रीब मध्य वर्ग की थाली खाली है बजाना कब है पूछता है भारत
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आर्थिक तंगी और मंहगाई से ग़रीब मध्य वर्ग की थाली खाली है बजाना कब है पूछता है भारत खबर देखे एक तरफ कोरोना की मार झेल रहे देश मे आर्थिक तंगी भी आ गई है आज ग़रीब और मध्य वर्ग के लोग बहुत परेशान है बढ़ती मंहगाई का असर ग़रीब की थाली में देखने को भी मिल रहा है एक तरफ देश मे कोरोना के हालात है दूसरी तरफ बढ़ रही है महगाई आम आदमी की थाली में आलू प्याज भी बहुत मुश्किल से पहुँच पर रह है लोगो की जेब बैसे भी खाली थी ऊपर से महगाई दम तोड़ रही है इंसान परेशान हो रहा है आज बाज़ार जाने में लोग डर रहे है जब खाद्य सामग्री आसमान छूने लगती है तो उसका असर मध्य वर्ग और गरीबी और रोज काम करके कमाने वाले लोगो पर पड़ता है शासकीय राशन की दुकानों में ग़रीबी रेखा के लोगो के लिए राशन तो मिल जाता है लेकिन अन्य खाद्य सामग्री के लिए भी पैसे की जरूरत पड़ती है जो लोगो के पास नही है जब पैसा ही नही है तो इतनी महगाई में खाद्य सामग्री कैसे खरीदे देश मे पेट्रोल के रेट आसमान छू रहे है जिसका असर आम आदमी को थाली में सीधे पड़ता है आज देश मे कई मुद्दे है लेकिन असली मुद्दा बढ़ती हुई महगाई है जिसके तरफ न सरकार देखना चा...